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मोतिहारी में संदिग्ध जहरीली शराब से 10 की मौत, कई मरीजों की हालत गंभीर

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बिहार के मोतिहारी में कथित जहरीली शराब पीने से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। प्रशासनिक पुष्टि और स्थानीय दावों के बीच आंकड़ों को लेकर असमंजस बना है, जबकि कई लोग अब भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

मोतिहारी/आलम की खबर: बिहार के मोतिहारी जिले में कथित जहरीली शराब पीने के बाद मची तबाही ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव और आसपास के इलाकों में हुई इस दर्दनाक घटना के बाद गांव-गांव में मातम पसरा है। कई परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया है, जबकि कई लोग अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस हादसे ने एक बार फिर शराबबंदी वाले बिहार में अवैध शराब के नेटवर्क और उसकी भयावहता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के माहौल में डर, गुस्सा और बेबसी साफ देखी जा रही है, क्योंकि एक साथ कई घरों की खुशियां उजड़ गई हैं।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि मौतों के आंकड़े को लेकर प्रशासनिक पुष्टि और स्थानीय दावों के बीच अंतर बना हुआ है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अब तक 8 लोगों की आधिकारिक पुष्टि की गई है, जबकि स्थानीय स्तर पर मौतों की संख्या 10 तक पहुंचने की बात कही जा रही है। यही वजह है कि पूरे मामले में आंकड़ों को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, इतना तय है कि यह हादसा बेहद गंभीर है और अस्पतालों में भर्ती कई लोगों की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। प्रशासन मृतकों और पीड़ितों की सूची का मिलान कर रहा है, ताकि आधिकारिक रिकॉर्ड पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके।

घटना की शुरुआती जानकारी के अनुसार, 2 अप्रैल 2026 से यह सिलसिला शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव में बड़ी संख्या में लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके कुछ ही समय बाद कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। पहले लोगों को उल्टी, बेचैनी, सिर दर्द और आंखों में दिक्कत जैसी शिकायतें हुईं, लेकिन जल्द ही हालात इतने खराब हो गए कि कई लोगों को आनन-फानन में सदर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। उसी दिन से मौतों का सिलसिला शुरू हो गया और फिर एक-एक कर कई लोग इसकी चपेट में आते चले गए। गांव में इस घटना के बाद से भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।

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अस्पताल में भर्ती मरीजों की हालत ने इस पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ा दी है। फिलहाल करीब 15 से 20 लोगों का इलाज जारी है और इनमें से कई मरीजों की हालत नाजुक बताई जा रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुछ पीड़ितों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है, जो जहरीली शराब के सबसे खतरनाक प्रभावों में से एक माना जाता है। अस्पताल में इलाजरत लोहा ठाकुर, राहुल कुमार, रविंद्र यादव, दिनेश यादव और उमेश राम समेत कई मरीजों को डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है। चिकित्सक लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर करने की तैयारी भी रखी गई है। अस्पताल परिसर में पीड़ितों के परिजनों की बेचैनी साफ देखी जा रही है।

इस घटना के बाद सदर अस्पताल का माहौल बेहद भावुक और तनावपूर्ण हो गया है। अस्पताल के बाहर परिजनों की भीड़, अंदर भर्ती मरीजों की हालत और लगातार आ रही दुखद खबरों ने पूरे माहौल को बोझिल बना दिया है। जिन परिवारों के सदस्य अब भी अस्पताल में भर्ती हैं, वे हर पल दुआ और डर के बीच जी रहे हैं। वहीं जिन घरों में मौत हुई है, वहां चीख-पुकार और मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में एक साथ इतनी भयावह स्थिति शायद ही कभी देखी हो। कई लोग अब भी इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं।

पुलिस और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि यह पूरा मामला कथित जहरीली शराब की आपूर्ति और सेवन से जुड़ा हुआ है। इसी सिलसिले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार अब तक कन्हैया, राजा, खलीफा, सुनील साह, नागा राय, जम्मू बैठा और परसौना के चौकीदार भरत राय को हिरासत में लिया गया है। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने इलाके में जहरीली शराब की सप्लाई, बिक्री या संरक्षण में भूमिका निभाई। चौकीदार की गिरफ्तारी ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि इससे यह सवाल और गहरा गया है कि क्या स्थानीय स्तर पर इस अवैध धंधे को संरक्षण मिल रहा था।

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जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि आखिर यह जहरीली शराब कहां तैयार की गई, किस चैनल से गांव तक पहुंचाई गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह केवल एक गांव तक सीमित मामला है या इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं। अक्सर ऐसे मामलों में सस्ती शराब के नाम पर जहरीले केमिकल मिलाकर लोगों की जान से खिलवाड़ किया जाता है। यही वजह है कि इस बार पुलिस सिर्फ छोटे सप्लायरों तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश में है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

यह घटना बिहार में शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। कागजों पर शराबबंदी लागू है, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाले ऐसे हादसे यह दिखाते हैं कि अवैध शराब का कारोबार अब भी कई इलाकों में गहराई से फैला हुआ है। हर बार कार्रवाई होती है, गिरफ्तारियां होती हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर वैसी ही त्रासदी सामने आ जाती है। इस बार भी स्थानीय लोगों में यही सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में जहरीली शराब गांव तक कैसे पहुंच गई और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है।

फिलहाल मोतिहारी का यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक सामाजिक त्रासदी के रूप में सामने आया है। कई घरों ने अपने कमाने वाले सदस्य खो दिए हैं, कई लोग अस्पताल में गंभीर हालत में हैं और पूरा इलाका सदमे में डूबा हुआ है। प्रशासनिक जांच, पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां अपनी जगह हैं, लेकिन सबसे बड़ा सच यही है कि जहरीली शराब ने एक बार फिर कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी है। अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या इस बार दोषियों तक सख्ती से पहुंचा जा सकेगा।

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